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2013 के एक वीकेंड, IT सिटी बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर निरपेश अलग नाश्ता करने की तलब में अपने इंजीनियरिंग कॉलेज की करीबी दोस्त नेहा के बताए कैफ़े, अर्बन ढाबा जाता है जहाँ उसकी मुलाक़ात उसके वूदमत आकाश से होती है। यह मुलाक़ात एक दिलचस्प मोड़ लेती है जब निरपेश आकाश को अपनी कॉरपोरेट लाइफ और नेहा के प्यार में जूझती ज़िन्दगी से रूबरू कराता है। निरपेश मन ही मन नेहा से प्यार करता है पर उसे इज़हार करने और अपनी ज़िंदगी में अचानक खोने से डरता है। उसकी रोज़ाना एक जैसी चलने वाली ज़िन्दगी में एक दम से भूकंप आता है जब नेहा का colleague रोहित उसे एक शाम प्रोपोज़ कर देता है और फिर इन्ही हालातों में खूबसूरत लड़की वाणी उसकी लाइफ में एक एक्टिंग वर्कशॉप के दौरान एंट्री मारती है और मन ही मन उसे चाहने लगती है। आकाश जो एक शौकिया लेखक है और जिसे एक इंटरेस्टिंग कहानी की तालाश है, उसको वह कहानी इत्तेफ़ाक़ से निरपेश के लाइफ में चल रहे उतार चढ़ाव में मिलती है। रोहित और नेहा के पनपते रिश्ते और वाणी का उसके प्रति झुकाव की टेंशन को महसूस करते हुए निरपेश एक दिन वाणी को अर्बन ढाबा लेकर आता है ताकि उसके साथ वह एक्टिंग वर्कशॉप के अंत में होने वाले प्ले का प्लाट डिसकस कर सके। वहाँ वाणी की मुलाक़ात आकाश से होती है जिसके बाद आकाश वाणी की खूबसूरती से घायल हो जाता है। इस मुलाक़ात के बाद वह अपने गुज़रे हुए कल और निरपेश वाणी नेहा और रोहित के रोज़ाना बढ़ रहे आपसी रिश्तों के तनाव को और गहरा कर देता है। क्या आकाश की काबलियत वाणी को इम्प्रेस कर पाती है? क्या निरपेश रोहित की पर्सनालिटी के जादू से नेहा को वापस अपनी तरफ खींच पाता है? क्या अर्बन ढाबा की हवाएँ इन सभी के जीवन का सही रुख तय कर पाएंगी?
Ahoj! Som Libroamiko, tvoj knižný radca.
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