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सच और झूठ के दरमियान, वो प्यार, जो कहीं पीछे छूट गया। एक ठुकराया हुआ प्रपोज़ल और उस दर्द से भागता हुआ दुष्यंत अकेला पेरिस जा पहुँचता है। वहाँ उसकी मुलाकात एक जिंदादिल बेबाक लड़की अवनी से होती है । पेरिस की गलियों में, दो दिल एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं, धीरे-धीरे, चुपचाप जैसे किस्मत खुद उन्हें जोड़ रही हो। लेकिन उस प्यार के मुकम्मल होने से पहले ही, एक बेरहम सच सामने आ जाता है। दगा, धोखा और गुस्से की आग में जलता हुआ दुष्यंत अवनी को अपमानित कर वह रिश्ता तोड़ देता है, जिसे उन्होंने धड़कनों से सींचा था। प्यार मिट जाता है पर यादें नहीं। पाँच साल बाद, दुष्यंत का बिजनेस साम्राज्य टूटने की कगार पर है। अब सिर्फ़ एक इंसान उसे बचा सकता हैं - अवनी। बीते कल की यादें, दबी हुई सच्चाइयाँ, और कुछ अनकहे राज़- दुष्यंत को एक-एक कर सबका सामना करना होगा। पर क्या वह उस दूरी को मिटा पाएगा, जो उसने खुद बनाई थी? या कुछ रिश्तों में एक बार दरार आ जाए तो उन्हें दोबारा नहीं भरा जा सकता? "तेरे मेरे बीच में" एक दिल छू लेने वाली कहानी है जो प्यार, दोस्ती, महत्वाकांक्षा और किस्मत के अनपेक्षित मोड़ों को बखूबी दर्शाती है।
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