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"दो धाराएँ, एक प्रकाश - सिख गुरु और मराठा संत" भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास की दो महान परंपराओं-सिख गुरुओं और मराठा संतों-के अद्भुत संगम की खोज है। यह पुस्तक उन समान मूल्यों, शिक्षाओं और विचारधाराओं को रेखांकित करती है, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों और कालखंडों में जन्म लेकर भी मानवता, साहस, सेवा, और समानता का एक ही प्रकाश फैलाया।
लेखक अजीत सिंह भल्ला गहन अध्ययन और सरल भाषा के माध्यम से पाठकों को यह दिखाते हैं कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक की आध्यात्मिक दृष्टि और संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, नामदेव, तथा समर्थ रामदास जैसे मराठा संतों की भक्ति-चेतना किस प्रकार एक साझा मानवीय संदेश देती है।
पुस्तक में धर्म और समाज के बीच सेतु बनाते हुए यह बताया गया है कि दोनों धाराएँ-सिख और मराठा-अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य, एक ही प्रकाश की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। यह ग्रंथ न केवल इतिहास को समझने में सहायता करता है बल्कि पाठकों को आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध करता है।
यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए है जो भारत की संत-परंपराओं, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, आध्यात्मिक दर्शन और ऐतिहासिक समन्वय को जानना चाहते हैं। ज्ञान, प्रेरणा और चिंतन से भरपूर, यह कृति आधुनिक समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।
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