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अंतर्मन पीडा़ ही अंतर्मन पुस्तक का आधार है। यह पुस्तक यथार्थ और सत्य के बीच अंतर को स्पष्ट करती है और समाज में व्याप्त विसंगतियों को उद्घाटित करती है। साथ ही अपील करती है कि हमें गलत को ग़लत कहने की सामर्थ्य रखनी चाहिए। लेखक ने समाजिक जीवन में रहते हुए जिन तकलीफों व विसंगतियों को महसूस किया है, वैसा ही इस पुस्तक में लिख दिया है। एक संवेदनशील मन जो भी महसूस करता है, उसके उद्गार इस पुस्तक में समाहित है।
इस पुस्तक में लेखक की प्रमुख इक्यावन (51) कविताओं का यह संग्रह यथार्थवादी दृष्टिकोण रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
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